Kriya in hindi

Kriya in hindi | क्रिया क्या हैं? | संपूर्ण जानकारी

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Kriya in hindi

कपालभाती ( फ्रंटल ब्रेन क्लींजिंग ) Kapalabhati ( Frontal Brain Cleansing ) ( Kriya in hindi )

कपालभाती को क्रिया (Kriya in hindi) (सफाई) माना जाता है और संस्कृत में, कपाल का अर्थ है ‘खोपड़ी’ और भाटी का मतलब है ‘चमक’। और कपालभाती (Kriya in hindi) का अभ्यास जो ललाट मस्तिष्क को साफ करता है। और कपालभाति खोपड़ी में स्थित अंगों के कार्य सुधारने में मददत करता है।

Kriya in hindi
Kapalbhati – Kriya in hindi

चलिए हम कपालभाती ( Kriya in hindi ) का पालन करते हैं नीचे दिए गए कदम से :

  1. किसी भी ध्यान मुद्रा में सीधे बैठें जैसे पद्मासन या वज्रासन।
  2. नासिका से गहरी सांस लें।
  3. इस तरह से जोर-जोर से सांस छोड़ें की निचले पेट को निष्कासित करने के लिए अनुबंधित किया जाता है और सहज रूप से श्वास लें और बिना कोई प्रयास किए हवा बाहर निष्क्रियता से छोड़ें। साँस लेने में प्रयास न करें। और निष्क्रिय निष्क्रियता के माध्यम से वायु शरीर में प्रवेश करेगी। यह वही है कपालभाति का आघात। एक बार में 20 स्ट्रोक से शुरुआत करें और ये सत्र एक चक्कर है एक प्रैक्टिकल में एक से तीन राउंड अभ्यास कर सकते हैं और एक दौर में धीरे-धीरे स्ट्रोक बढ़ा सकते हैं।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points when doing Kapalabhati Kriya in hindi ) :

ये करना ( Do’s )

• कम साँस लेना निष्क्रिय होना चाहिए,और जबकि साँस छोड़ना और चाहिए।
• कपालभाती आसन के बाद होनी चाहिए लेकिन पहले ध्यान अभ्यास किया जाता है।

ये नही करना ( Don’ts )

• छाती को न हिलाएं या
साँस छोड़ने के दौरान कंधे न हिलाएं ।
• चेहरा अनुबंध या विकृत न करें।

लाभ ( Benefits )

• यह उदर क्षेत्र में तंत्रिकाओं को उत्तेजित करता है,और स्वर को बढ़ाता है और पेट की मांसपेशियों और पाचन में सुधार करता है।
• कपालभाति सामान्य श्वास की तुलना में फेफड़ों से अधिक कार्बन-डाइऑक्साइड और अन्य अपशिष्ट गैसों को बाहर निकालता है।
• यह हृदय और फेफड़ों की क्षमता में सुधार करता है और इसलिए इसके लिए अच्छा है दमा।
• यह पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
• यह शरीर को स्फूर्ति देता है और सुस्ती को दूर करता है।

सीमा ( Limitation )

• कार्डियो-वैस्कुलर समस्याओं, उच्च रक्त से पीड़ित दबाव, हर्निया, चक्कर और गैस्ट्रिक अल्सर की शिकायतवाले कपालभाति का अभ्यास करने से बचें।

अग्निसार Agnisara ( Kriya in hindi )

इसे योग साधनाओं में एक क्रिया के रूप में माना जाता है। अग्निसार (Kriya in hindi) का अर्थ गैस्ट्रिक और ये गैस्ट्रिक की आग को बढ़ाता है। संस्कृत में अग्नि का अर्थ है ‘अग्नि’ और सारा का मतलब है ‘सार’ और यह क्रिया अग्नि के सार को नियंत्रित करती है और यह अभ्यास नाभि क्षेत्र में स्थित पेट के अंगों की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करता है।

नीचे दिए गए चरणों का पालन करके हम अग्निसार का प्रदर्शन करें :

  1. पैरों को एक-दूसरे से अलग करके खड़े हों।
  2. हाथों को घुटने से ऊपर जांघों पर रखें। पूरी तरह से साँस छोड़ें।
  3. घुटनों और ऊपरी हिस्से को आगे की ओर झुकाएं।
  4. पेट की मांसपेशियों को लंबे समय तक तेजी से सिकोड़ना और फैलाना और सांस को बाहर रखते हुए आराम से रहें।
  5. फिर धीरे-धीरे सांस लें।और अभ्यास को 2-3 बार दोहराएं।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points when doing Agnisara Kriya in hindi ) :

ये करना ( Do’s )

• यह एक खाली पेट अभ्यास करने के लिए सलाह दी जाती है।
• दो या तीन बार के लिए अभ्यास करें।

ये नही करना ( Don’ts )

• प्रयास मे थोड़ी सी भी सांस को अंदर लेने से बचें।
• भोजन के बाद इसका अभ्यास न करें।

लाभ ( Benefits )

• यह पेट की मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को मजबूत करता है।
• यह गैस्ट्रिक की आग में सुधार करता है और भूख को उत्तेजित करता है।
• यह कब्ज और जिगर की सुस्ती को कम करता है।
• यह सुस्ती और अवसाद को कम करता है।

सीमा ( Limitation )

• उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, पेप्टिक से पीड़ित व्यक्ति और अल्सर या क्रोनिक डायरिया वाले इस क्रिया (Kriya in hindi) को नहीं करना चाहिए।

प्राणायाम ( Pranayama )

प्राण का तात्पर्य ‘सार्वभौमिक जीवन शक्ति’ से है और अयामा का अर्थ ‘नियमन’ करना है। और
प्राण वह महत्वपूर्ण ऊर्जा है जिसके बिना शरीर जीवित नहीं रहता। प्राणायाम सांस लेने की तकनीक से संबंधित है जो साँस लेने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। और कुछ सामान्य प्राणायामों में शामिल हैं – विलोमा, भस्त्रिका, उज्जायी, शीतली, आदि।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम ( वैकल्पिक नथुने से श्वास ) Anuloma-viloma Pranayama ( Alternate Nostril Breathing ) ( Kriya in hindi )

एनुलोमा का अर्थ है ‘ओर’ और विलोमा का मतलब है ‘रिवर्स’ और इसे एनुलोमा कहा जाता है-और विलोमा क्योंकि वैकल्पिक नथुने का उपयोग किया जाता है और इस ईसलिए विलोमा कहते है प्रत्येक साँस लेने और साँस छोड़ने के लिए। एक बाएं नथुने से होकर बाहर निकलता है और दाएं नथुने से सांस अंदर लेते है, फिर आदेश के माध्यम से साँस लेना और छोड़ना उलट करते है दायीं नासिका, से श्वास छोड़ते हे और बाएं नथुने साँस लेते है।और इस प्राणायाम को नाडी-षोडन प्राणायाम भी कहते हैं। अगर हो सके तो कुंभका के साथ प्रदर्शन करो।

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Anuloma-Viloma Pranayama

नीचे दिए गए चरणों का पालन करके हम अनुलोम-विलोम करते हैं :

  1. पद्मासन या किसी अन्य आरामदायक ध्यान आसन की स्थिति में बैठें।
  2. शरीर को सीधा रखें और हाथों को संबंधित घुटनों पर रखें।
  3. दाहिने हाथ को उठाएं और दाहिने अंगूठे को दाहिने नथुने पर रखें और इसे बंद करें।
  4. बाएं नथुने के माध्यम से धीरे-धीरे श्वास लें।
  5. अनामिका और छोटी उंगली के द्वारा बाईं नासिका को बंद करें और दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
  6. दाहिने नथुने के माध्यम से फिर से श्वास लें।
  7. दाएं नथुने को अंगूठे से बंद करें और बाईं नथुने के ओर से सांस छोड़ें। यह एनुलोमा-विलोमा का एक दौर है।
  8. इसे 10 बार दोहराएं।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points when doing Anuloma-viloma Pranayama ) :

ये करना ( Do’s )

• बिना हवा के धीरे-धीरे सांस अंदर लें और पेट को उभारना या (फूगाना)।
• साँस लेने के बीच और साँस छोड़ना 1: 1 या 1: 2 का अनुपात रखें।

ये नही करना ( Don’ts )

• नाक से ध्वनि उत्पन्न करने से बचें।
• नाक जोर से दबाओ मत।
• सांस को बनाए रखने से बचें और शुरुआत में करने वाले पहिले (कुम्भक) करे।

लाभ ( Benefits )

• यह मन को शांत करता है और एकाग्रता में सुधार करता है।
• यह पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त उन्हें प्रदान करके शरीर की सभी कोशिकाओं के कामकाज में सुधार करता है।
• यह रक्त को शुद्ध करता है।
• यह मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति में सुधार करता है।
• यह रक्तचाप को विनियमित करने में मदद करता है।
• यह चिंता को कम करके तनाव को प्रबंधित करने में मदद करता है।
• यह अस्थमा, उच्च या निम्न रक्त जैसे कई रोगों में फायदेमंद है जैसे दबाव, अनिद्रा, पुराने दर्द, अंतःस्रावी असंतुलन, दिल-समस्याओं, अति सक्रियता, आदि मे फायदेमंद है।

सीमा ( Limitation )

• शुरुआत में सांस की अवधारण को टालना चाहिए।

भस्त्रिका प्राणायाम ( Bhastrika Pranayama ) ( Kriya in hindi )

भस्त्रिका शब्द संस्कृत से लिया गया है और ‘भाव’ शब्द जिसका अर्थ है ‘धौंकनी'(भाता) की एक जोड़ी।और यह प्राणायाम, में भस्त्रिका या धौंकनी की क्रिया नकल कर रहे हैं। इस प्राणायाम में, साँस लेना और तेजी से उत्तराधिकार (विरासत) में साँस छोड़ना किया जाता है।और जिस तरह एक लोहार धौंकनी (भाता) को अंदर-बाहर करता है। तेजी से उत्तराधिकार में सक्ती, और कम और इसे सिकोड़ते हुए करे इसी तरह सांस अंदर और बाहर ली जाती है मजबूरन पेट को पतला और सिकोड़ कर विरासत और तेजी से करे।

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Bhastrika Pranayama

आइए हम भस्त्रिका प्राणायाम करें नीचे दिए गए चरणों का पालन कर के :

  1. पद्मासन, अर्धपद्मासन या।किसी अन्य आसन या ध्यान में बैठें और शरीर को सीधा रखें।
  2. धीरे-धीरे नासिका के माध्यम से श्वास लें।
  3. फिर नथुने के माध्यम से जल्दी और जोर से साँस छोड़ें।
  4. बल के साथ तुरंत श्वास ले।
  5. इस जोरदार तेजी से साँस छोड़ने और साँस लेने की गिनती जारी रखें दस साँस तक।
  6. दसवीं सांस के अंत में, अंतिम साँस छोड़ना है। भस्त्रिका प्राणायाम मे एक गहरी साँस लेना और धीमी साँस छोड़ना यह एक दौर है।
  7. दूसरा दौर शुरू करने से पहले और इस दौर के बाद कुछ सामान्य सांसें लें।
  8. भस्त्रिका प्राणायाम के तीन दौर पूरे करें और भस्त्रिका प्राणायाम की तकनीक में भिन्नता हो सकती है।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points when doing Bhastrika Pranayama ) :

ये करना ( Do’s )

• सीधे बैठें और छाती उचित स्ट्रोक के लिए खोलें।
• फेफड़े, डायाफ्राम और पेट प्रत्येक साँस के साथ चलना चाहिए और साँस छोड़ना को चाहिए।
•आसन और नादिशोधन प्राणायाम होने के बाद भस्त्रिका प्राणायाम करना अभ्यास करना चाहिए ।

ये नही करना ( Don’ts )

• क्षमता से अधिक मत जाओ।
• छाती और कंधे नहीं हिलने चाहिए ।
• गर्म स्थिति के अत्यंत में इसका अभ्यास न करें।

लाभ ( Benefits )

• यह गैस्ट्रिक आग को बढ़ाता है और भूख में सुधार करता है।
• यह कफ को नष्ट करता है।
• यह अस्थमा के मामले में फायदेमंद है।

सीमा ( Limitation )

• कान के संक्रमण के दौरान भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना जाना चाहिए। और
दिल की समस्याओं, उच्च रक्तचाप, चक्कर से पीड़ित व्यक्ति,पेट के अल्सर में इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

Conclusion :

इस article में आपको Kriya in hindi और Pranayama in hindi ये दोनो क्या हैं सबकुछ समज आया होगा। हमने इसे बहुत आसान शब्दो में इनके सारे points cover किये हैं। अगर आपको ये article अच्छा लगा हो तो इस article को ज्यादा से ज्यादा share करो। और ऐसे article पढने के लिये हमारे blog पर visit करते रहे। धन्यवाद !

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