Asan

Asan kya hain in Hindi | आसन क्या हैं?

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आसन (Asan)

हम सभी जानते हैं कि आसन (Asan) हमारे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए फायदेमंद होते हैं। आपने पिछली कक्षाओं में इतने सारे आसन (Asan) सिखें हैं। अब, हम इस खंड में कुछ और आसनों के बारे में चर्चा करेंगे।

ताड़ासन ( पाम ट्री आसन ) Tad Asan ( Palm Tree Posture )

संस्कृत में टाडा का अर्थ है ‘ताड़ का मतलब पेड़’। इसे ताड़ासन इसलिए कहा जाता है की इस आसन (Asan) में छात्र सीधे ताड़ के पेड़ की तरह खडे हो जाते है। इसलिए, यह आसन का नाम ताड़ासन रखा गया है।

Asan
Tad Asan

हम नीचे दिए गए चरणों का पालन करके ताड़ासन करेंगे :

  1. खड़े हो जाओ, पैर एक साथ, जांघों के किनारे हाथ रखना पीठ सीधी और सामने टकटकी।
  2. बाजुओं को ऊपर की ओर तानें, उन्हें सीधा रखें और साथ समानांतर रखें एक दूसरे को ऊर्ध्वाधर स्थिति में, हथेलियों को अंदर की ओर रखे
  3. धीरे-धीरे हील्स को ऊपर उठाएं जितना आप कर सकते हैं और पंजों पर खड़े हों जाये जितना हो सके शरीर को स्ट्रेच करें। 5-10 सेकंड के लिए स्थिति बनाए रखें।
  4. वापस आने के लिए, पहले फर्श पर धीरे-धी एड़ी ले आओ जांघों के किनारे हाथों को नीचे लाएं और आराम करें।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points ) :

ये करना ( Do’s )

• भीतरी ऊपरी भुजाएँ होनी चाहिए संबंधित कानों को छूना।
• बाजुओं और उंगलियों को स्ट्रेच करें पूरी तरह से।
• सिर, गर्दन और शरीर को एक सीधी रेखा में रखें

ये नही करना ( Don’ts )

• आगे की ओर न झुकें और पिछे की ओर भी नही

लाभ ( Benefits )

• यह पूरे शरीर की मांसपेशियों को ऊर्ध्वाधर खिंचाव देता है।
• यह जांघों, घुटनों और टखनों को मजबूत करता है।
• यह बच्चों की ऊंचाई में सुधार करने में मदद करता है।
• यह आसन किसी आत्म जागरूकता एक को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
• यह आलस्य और सुस्ती को दूर करने में मदद करता है।

सीमा ( Limitation )

• जिन लोगों को चक्कर की शिकायत है, उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

कटिचक्रासन ( लंबर ट्विस्ट आसन ) Katichakr Asan ( Lumber Twist Posture )

संस्कृत में कटि का अर्थ है ‘कमर’ और चक्र का अर्थ है ‘पहिया’। और ये आसन (Asan), कमर को दाईं ओर और बाईं ओर ले जाया जाता है। बाहों के साथ कमर की चाल एक पहिया की तरह। इसलिए, इसे कटिचक्रासन कहा जाता है।

Asan
Katichakra Asan

आइए हम निम्नलिखित करके कटिचक्रासन करें नीचे दिए गए कदम से :

  1. पैरों के बल जमीन पर खड़े हों जाये और पैरो मे 12 इंच का ग्याप रखे।
  2. अब, बाहों को सामने फैलाकर रखें और हथेलियों के साथ शरीर एक दूसरे के सामने रहे और
    कंधे के स्तर रहे।
  3. साँस लेते समय, बाहों को धीरे-धीरे घुमाएँ अपने शरीर के दाईं ओर।
  4. अपने शरीर को कमर से दाईं ओर मोड़ें और जहां तक ​​संभव हो अपनी बाहों को वापस ले जाएं।
  5. दाहिनी ओर झूलते समय, दाहिने हाथ को सीधा रखें और बांया हाथ मुड़ा हुआ रहे।
  6. बाईं ओर के रूप में अच्छी तरह से घुमा अभ्यास दोहराएं।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points ) :

ये करना ( Do’s )

• दाहिने हाथ को सीधा रखते हुए दाईं ओर मुड़ना और ठीक इसके विपरीत मुड़ना।
• उंगलियों को बाहर की ओर खींचा जाना चाहिए। जब श्वास अंदर लेते हुए वापस आये और साँस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति मे आ जाये।
• आसन की अंतिम स्थिति में पीछे टकटकी लगाए।

ये नहीं करना ( Don’ts )

• आगे न झुकें या और पिछे भी न झुकें।
•शरीर के निचले हिस्से को स्थानांतरित न करें।
• शरीर को झटका न दें।

लाभ ( Benefits )

• यह पतला बनाने में मदद करता है।
• यह कब्ज से राहत देता है और लंबर क्षेत्र को मजबूत बनाता है।
• यह सांस की बीमारियों के लिए अच्छा है। और फेफड़ों का क्षय रोग रोक सकता है। • यह कंधे, गर्दन, हाथ, पेट, पीठ और जांघों को मजबूत करता है।

सीमा ( Limitation )

• पुरानी रीढ़ की हड्डी में दर्द या चोट लगी हो तो इस आसन (Asan) अभ्यास न करें।

सिम्हासन ( सिंह मुद्रा ) Simh Asan ( Lion Posture )

संस्कृत में सिम्हा का अर्थ है ‘सिंह’। इस आसन में, खुला हुआ चेहरा, मुँह और जीभ ठोड़ी की ओर फैली हुई भयंकर होती है और ये आसन सिंह का रूप,हे इसलिए, इसे सिम्हासन कहा जाता है।

Asan
Simh Asan

नीचे दिए गए चरणों का पालन करके हम सिम्हासन करते हैं :

  1. संबंधित घुटनों पर हथेलियों के साथ वज्रासन में बैठें।
  2. घुटनों को अलग रखें।
  3. दोनों एड़ी को पेरिनेम के नीचे रखें।
  4. दोनों हथेलियों को संबंधित घुटनों पर व्यापक रूप से फैलाकर रखें और उँगलियाँ बाहर रखे
  5. घूटनो के आगे झुकें और हथेलियों को फर्श के बीच रखें
  6. मुंह खोलें और जीभ को जितना हो सके बाहर की ओर फैलाएं और भौमध्या (भौंहों का केंद्र) पर टकटकी लगाये।
  7. भारुमादि द्रुति जारी करें और अपनी आंखों को आराम दें।
  8. हथेलियों को संबंधित घुटनों पर रखकर वज्रासन में आएं
    और आराम करो।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points ) :

ये करना ( Do’s )

• घुटने को आराम करना चाहिए।
• एड़ी पर बैठें।
• नितंबों को ऊपर उठाना है।
• अंगुलियों को शेर के पंजे की नकल में फैलाकर रखना चाहिए।

ये नहीं करना ( Don’ts )

• जीभ का फैलाव न करें क्षमता से परे।

लाभ ( Benefits )

• यह चेहरे और गर्दन की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद है।
• जीभ अधिक लोचदार और स्वस्थ हो जाती है।
• लार ग्रंथियां मजबूत हो जाती हैं।
• यह थायराइड के कामकाज को नियंत्रित करता है।
• यह सुस्ती और अवसाद को कम करने में मदद करता है और भाषण का slurring में सुधार करता है।

सीमा ( Limitation )

• पीठ में दर्द, कूल्हे की गठिया और घुटने, गले की समस्या और जबड़े में दर्द हो तो ये आसन न करे

मंडूकासना ( मेंढक मुद्रा ) Manduk Asan ( Frog Posture )

मंडुका, एक संस्कृत शब्द का अर्थ है ‘मेंढक’। इस आसन में, अंतिम आसन (Asan) एक मेंढक के आकार जैसा दिखता है। इसलिए, इसका नाम मंडुकासन है।

Asan
Manduk Asan – Step 1
Asan
Manduk Asan – Step 2

नीचे दिए गए चरणों का पालन करके हम मंडूकासना करें :

  1. वज्रासन में बैठें।
  2. मुट्ठी को अंगूठे से अंदर करें और नाभि के पास रखें और नाभि क्षेत्र को दबाएँ।
  3. धीरे-धीरे साँस छोड़ें, कमर से आगे झुकें, छाती को नीचे करें,
  4. सिर और गर्दन को ऊपर उठाकर सामने की ओर रखें।
  5. 5-10 सेकंड के लिए आराम से स्थिति बनाए रखें।
  6. मुद्रा जारी करने के लिए, बैठने की स्थिति में वापस आएं और अंदर बैठें अपनी मुट्ठी नाभि क्षेत्र से हटाएं और वज्रासन मे बैठ जाये।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points ) :

ये करना ( Do’s )

• सिर और गर्दन को ऊपर उठाकर अंतिम स्थिति में रखें।
• सामने देखें।
• नाभि क्षेत्र पर दबाव डालें।

ये नहीं करना ( Don’ts )

• क्षमता से आगे झुकना नहीं है।
•आगे झुकते समय शरीर को झटका न दें।

लाभ ( Benefits )

• यह आसन भारी बेल, जांघ के लोगों या कूल्हों के लिए फायदेमंद है।
• यह पेट से गैसों को समाप्त करता है।
• यह कब्ज, मधुमेह और पाचन रोग से पीड़ित लोगों को लाभ पहुंचाता है।

सीमा ( Limitation )

• स्लिप्ड डिस्क, लम्बर स्पॉन्डिलाइटिस या किसी अन्य प्रमुख बीमारी के लिए और रीढ़ की बीमारी के लिए इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

उत्ताना मंडूकासना ( मेंढक मुद्रा बढ़ाकर ) Uttana-manduk Asan ( Stretched up Frog Posture )

उत्ताना का अर्थ है ‘सीधा ’या upright फैला हुआ’ या बढ़ा हुआ ‘और मण्डुका का अर्थ है’ मेंढक ‘। इस आसन (Asan) की अंतिम स्थिति में, शरीर मे एक खिंचाव या ऊपर की तरह दिखता है। मेंढक, और उत्तरा इसलिए, इसे कहा जाता है।

Asan
Uttana-Manduk Asan

आइए हम उत्तरा-मंडुकासन करें नीचे दिए गए चरणों का पालन करके :

  1. वज्रासन में बैठें।
  2. दोनों घुटनों को अलग रखें। इस हद तक कि दोनों पैरों के पंजे एक-दूसरे को छूते हैं।
    सिर, गर्दन और धड़ को सीधा रखे। आंखें या तो बंद रहे या खुली रखे।
  3. सिर के ऊपर हाथ उठाएं, उन्हें मोड़ो और उन्हे पीछे ले जाएं।
  4. दाएं हथेली को बाएं कंधे के नीचे और बाएं हथेली को दाईं कंधे के ओर रखें ।
  5. 5-10 सेकंड के लिए आराम से इस स्थिति को बनाए रखें।
  6. वापस आने के लिए, हाथों को एक-एक करके हटाएं, घुटनों को लाएं एक साथ और वज्रासन पर आएं।

निम्नलिखित पाॅइंट याद रखें ( Remember the following points )

ये करना ( Do’s )

• सिर ओर कोहनी चारों और से घिरी हुयी चाहिए
• रीढ़ और गर्दन को सीधा रखें।

ये नहीं करना ( Don’ts )

• बाहों को मोड़ें नहीं।
• आगे की ओर झुकें नहीं।

लाभ ( Benefits )

• यह पीठ के दर्द को कम करने में मदद करता है।
• यह छाती और पेट में रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
• यह पेट और कंधे की मांसपेशियों को टोन करता है।
• यह आंदोलनों में सुधार करके फेफड़ों डायाफ्राम के कामकाज में सुधार करता है।

सीमा ( Limitation )

• पुराने घुटने के दर्द और बवासीर से पीड़ित लोगों को इस आसन से बचना चाहिए।

Conclusion

आशा करता हूं की आपको यह article अच्छा लागा होगा और आसन (Asan) क्या हैं और उसके प्रकार कौनसे हैं और उसके लाभ क्या हैं यह आपको बहुत ही आसानी से समज आया होगा। साथ ही साथ यह 5 आसन (Asan) किन किनको करना चाहीये और किन किनको नही और उसकी limitations क्या हैं ये सभी points आप समज गये होंगे। Article अच्छा लगा होगा तो अपने परिवार और दोस्तो के साथ जरूर शेयर करे। धन्यवाद !

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